यातायात

सागर जिले में रेल सुविधा शुरुआत से अब तक

सागर जिले में ब्रॉडगेज रेल्वे लाइन की कुल लंबाई करीब 180 किमी है. आधिकारिक जानकारी के अनुसार सागर में रेल सुविधा की शुरुआत 1889 में हुई. द सेटलमेंट रिपोर्ट ऑफ सागर डिस्ट्रिक्ट फॉर 1911-16 में इस बात का उल्लेख है कि रेल्वे संचार व्यवस्था में वृद्धि कैसे हुई.

इस रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘बाहरी दुनिया में रेल्वे संचार व्यवस्था सन् 1870 में उस समय कायम हुई, जब ग्रेट इंडियन पेनिनसुला रेल्वे बंबई से जबलपुर के लिए आरंभ की गई. तब सागर का निकटतम् रेल्वे स्टेशन नरसिंहपुर जिले में करेली था, जो कि सागर से करीब 120 किमी तथा रहली तहसील की दक्षिणी सीमा से करीब 35 किमी दूर था. इटारसी से झांसी के बीच खुरई तहसील के पश्चिमी भाग से होकर जाने वाली इंडियन मिडलैंड रेल्वे लाइन का काम सन् 1889 में पूरा हो गया था.

बीना-खुरई-सागर के बीच (75 किमी) रेल्वे लाइन उसी वर्ष आरंभ की गई, जिसे सन् 1895 में दमोह तक ले जाया गया. सागर-दमोह (78 किमी) रेल्वे लाइन को यातायात के लिए मार्च, सन् 1898 में खोला गया. इसे जनवरी सन् 1899 में दमोह से कटनी (111 किमी) के बीच यातायात के लिए खोल दिया गया।’’

स्वतंत्रता के बाद इस क्षेत्र में रेल सुविधाओं के विस्तार के लिए कुछ खास प्रयास नहीं किए गए लेकिन पिछले दो दशकों के दौरान काफी बदलाव आए हैं. संभाग के शेष तीन जिले पन्ना, छतरपुर और टीकमगढ़ को रेल से जोड़ने वाली ललितपुर-सिंगरौली रेलमार्ग पर काम शुरु हो चुका है. खजुराहो को महोबा (उप्र) से जोड़ने का काम समाप्त होने के करीब है.

सागर-कटनी सेक्शन: इस 189 कि मी लंबे रेलखंड का निर्माण कार्य दो चरणों में पूरा किया गया था. इसका पहला भाग सागर-दमोह सेक्शन है, इसे 26 मार्च 1898 को खोला गया जिसकी कुल लंबाई78 किमी है. दूसरा भाग दमोह-कटनी सेक्शन है, इसे 1 मार्च 1899 को खोला गया. इसकी लंबाई 111 किमी है.

सागर-कटनी सेक्शन की जिले में कुल लंबाई 38 किमी है. इस मार्ग पर जिले का अंतिम स्टेशन गणेशगंज है. सागर से इसकी दूरी 35 किमी है. यह रेल लाइन सागर जिले के करीब बीचों-बीच से होकर सागर-दमोह सड़क के समानांतर चलती हुई उपजाऊ क्षेत्र से गुजरती है. बेबस, सुनार, कोपरा और व्यारमा (दमोह जिला) आदि नदियां इस मार्ग को काटते हुए बहती हैं.

बीना-सागर सेक्शन: इसे यातायात के लिए 5 जून 1889 को खोला गया. जिले में इसकी कुल लंबाई 75 किमी है.

बीना-गुना सेक्शन: इसे 23 सितंबर 1895 को खोला गया. जिले में इसकी लंबाई 24 किमी है. इस पर जिले का अंतिम स्टेशन बीना से 15 किमी सीमलखेड़ी है.

बीना-झांसी सेक्शन: इसे 1 जनवरी 1889 को यातायात के लिए खोला गया. जिले में इसकी लंबाई 31 किमी है. इस मार्ग पर जिले का अंतिम स्टेशन आगासौद है, जो सागर से 84 किमी दूर है. इससे पहले इस मार्ग पर करौंद स्टेशन भी सागर जिले में है.

बीना-इटारसी सेक्शन: मूलत: यह यह झांसी-भोपाल सेक्शन का एक भाग है. इस महत्वपूर्ण रेलमार्ग को यातायात के लिए 1 जनवरी 1889 को खोला गया था. जिले में इसकी कुल लंबाई 16 किमी है. मंडी बामौरा इस सेक्शन में जिले का अंतिम स्टेशन है, जो सागर से 91 किमी की दूरी पर है.


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