इतिहास

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रात के अंधेरे में जगमगाता कटरा बाजार। तीन बत्ती का दृश्‍य।

सरोवर के कारण मिला सागर नाम

सागर के संबंध में विस्तृत जानकारी ‘टालमी’ के लिखे विवरणों से प्राप्त होती है। टालमी के अनुसार ‘फुलिटों’ (पुलिंदौं) का नगर ‘आगर’ (सागर) था। समझा जाता है कि इसका नाम ‘सागर’ उस विशाल सरोवर के कारण पड़ा, जिसके किनारे नगर स्थित है।

गुप्त वंश के शासनकाल में इस क्षेत्र को सर्वाधिक महत्व मिला। समुद्रगुप्त के समय में एरण को स्वभोग नगर के रूप में उद्धृत किया गया है और यह राजकीय तथा सैन्य गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण केंद्र था। नवमीं शताब्दी में यहां चंदेल और कलचुरी राजवंशों का आधिपत्य हुआ और 13-14 वीं शताब्दी में मुगलों का शासन शुरु होने से पूर्व यहां कुछ समय तक परमारों का शासन भी रहने के संकेत मिलते हैं।

पंद्रहवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में सागर पर गौंड़ों ने कब्जा जमाया। फिर महाराजा छत्रसाल ने धामोनी, गढ़ाकोटा और खिमलासा में मुगलों को हराकर अपनी सत्ता स्थापित की लेकिन बाद में इसे मराठाओं को सौंप दिया। सन् 1818 में अंग्रेजों ने अपना कब्जा जमाया और यहां ब्रिटिश साम्राज्‍य का आधिपत्य हो गया। सन् 1861 में इसे प्रशासनिक व्यवस्था के लिए नागपुर में मिला दिया गया और यह व्यवस्था सन् 1956 में नए मध्यप्रदेश राज्‍य का गठन होने तक बनी रही।

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