पुरा संपदा

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शहर में कई पुरानी इमारते हैं जिनका ऐतिहासिक महत्‍व है।

सागर जिले की पुरा संपदा

सागर जिले की सीमाओं में आठवीं शताब्दी से लेकर सत्रहवीं शताब्दी के बीच की बेशकीमती पुरा संपदा बिखरी पड़ी है। बीना के पास स्थित एरण में मिले अवशेष बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। एरण में मिले साक्ष्यों से पता चलता है कि यह स्थान ईसा पूर्व काल में भी आबाद था।

इस क्षेत्र में नवीं शताब्दी के पश्चात चंदेलों और कलचुरी राजवंशों का उदय हुआ। उनके शासनकाल के अनेक वास्तु अवशेष पाली, पिठौरिया, मढ़ पिपरिया, देवरी, बीना बाराह, पजनारी, रहली, भापेल आदि स्थानों में विद्यमान हैं।

माना जाता है कि इस क्षेत्र पर कुछ समय मालवा के परमार शासकों का भी शासन रहा है। मंडी बामौरा, बिनायका, राहतगढ़ और हिन्नौद आदि क्षेत्रों में परमारकालीन वास्तु अवशेष बड़ी तादाद में पाए जाते हैं। रहली का सूर्य मंदिर एक संरक्षित स्मारक है।

हाल ही में भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण विभाग ने जिले का करीब 3 वर्ष लंबा सर्वे पूरा किया है। इस सर्वे में जिले की असंरक्षित पुरा संपदा के बारे में बहुत महत्‍वपूर्ण जानकारियां मिली हैं। विभाग इन्‍हें फिलहाल सूचीबद्ध करने का काम कर रहा है।

जिला मुख्यालय में एक पुरातत्व संग्रहालय भी है,  जिसमें चार सौ से अधिक दुर्लभ पाषाण कलाकृतियां हैं। जिला प्रशासन अब संग्रहालय के लिए एक भवन बनवाने की योजना बना रहा है। जिले में गढ़ौला जागीर जैसे कई अन्य स्थानों से समय-समय पर बेशकीमती पुरा संपदा मिलने के समाचार आते रहते हैं।

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कॉपीराइट: डेली हिंदी न्‍यूज डॉट कॉम

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