मध्यस्थता वर्तमान समय की जरूरत : न्‍यायधीश दुबे

सागर (डेली हिंदी न्‍यूज़)। जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष वीके दुबे की अध्यक्षता में मध्यस्थता जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन जिला न्यायालय परिसर के सभागार में किया गया।

जिला न्यायाधीश वीके दुबे ने कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए कहा कि मध्यस्थता आज के समय की जरूरत है। इस विधि से हम वर्षो से न्यायालय में विचाराधीन लंबित मामलों को आपसी सौहार्द्र के भाव से समाप्त कर सकते हैं। इस तरह पक्षकारों के समय और धन की बचत होने के साथ-साथ अनावश्यक तनाव व दुश्मनी से बच सकते हैं। इसलिये सभी को मध्यस्थता कार्यवाही को अधिक से अधिक अपनाकर विवादों का निपटारा किया जाना सर्वोत्तम विकल्प है।

जिला न्यायाधीश ने बताया गया कि आज कल समाज के लिए नशा एक बहुत बड़ी समस्या बनती जा रही है। इससे न केवल व्यक्ति स्वंय का नुकसान करता है अपितु अपने परिवार व समाज का भी नुकसान करता है। कई बार व्यक्ति नशे की हालत में ऐसे कई अपराध कर बैठता है जो कि वह सामान्य अवस्था में नहीं करता हैं। ऐसे अपराधों से बहुत अधिक क्षति भी कारित होती है। इसलिये नशा ना केवल किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है बल्कि वह समाज के निर्माण में बाधक है।

इस अवसर पर न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव अरविंद कुमार जैन ने बताया कि नशा के उन्मूलन हेतु अब जिला विधिक सेवा प्राधिकरण प्रयास करेगा। इस हेतु पूर्व में ही एक कमेटी का गठन किया जा चुका है। जिसमें शासकीय व अशासकीय ऐसे व्यक्तियों को सम्मिलित किया गया है जो कि समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचकर समाज से नशा रूपी बुराई को मिटाने का प्रयास कर सकें।

कार्यक्रम अवसर पर न्यायाधीश एवं जिला रजिस्ट्रार प्रशांत कुमार, जिला विधिक सहायता अधिकारी पूर्णिमा सैयाम के साथ-साथ समाज के विभिन्न वर्गो के समाजसेवी महिला-पुरूष, आंगनबाडी कार्यकर्ता, शौर्यादल कार्यकर्ता, विधि छात्र-छात्राएं एवं पैरालीगल वॉलेंटियर्स आदि उपस्थित थे।


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